गिरा ज़रूर हूं मगर हारा नहीं हूं

गिरा ज़रूर हूं मगर हारा नहीं हूंसकी चमक ज़रा देर से आती है।

ठोकर खाकर संभलने की हिम्मत है अभी भी मुझमें
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ठोकरें खाकर संभालना सीख लिया है हमने
पत्थरों को भी रास्ता बनाकर चलना सीख लिया है हमने।

गिरकर उठने की आदत डाल लो लोगों
बस इंतजार मेरे रब के इशारे का है।

सोच समझकर हमें गिराने की अब कोशिश करना
घर से मां की दुआओं के साथ निकालना अब सीख लिया है हमने।

गिरा ज़रूर हूं मगर हारा नहीं हूं
सच्चाई की चमक ज़रा देर से आती है।

ठोकर खाकर संभलने की हिम्मत है अभी भी मुझमें
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ठोकरें खाकर संभालना सीख लिया है हमने
पत्थरों को भी रास्ता बनाकर चलना सीख लिया है हमने।

गिरकर उठने की आदत डाल लो लोगों
बस इंतजार मेरे रब के इशारे का है।

सोच समझकर हमें गिराने की अब कोशिश करना
घर से मां की दुआओं के साथ निकालना अब सीख लिया है हमने||

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