देश के शहीद परिवारों के नाम

कुछ लोग तो शहीदों की मां पर भी तरस नहीं खाते
बच्चो बच्चियों पर जरा भी रहम नहीं खाते।

ये कैसी सोच हो गई है अब लोगों की
जिसका बेटा जुदा हो गया हो सेवा में लोगों की।

कोई अपने बच्चे के नन्हे गाल पर भी हाथ ना लगा पाया
कोई अपनी मा की बीमारी में भी सेवा ना कर पाया।

कोई बाप को कांधा तक ना दे पाया
कोई अपनी बीवी को भी उसका प्यार ना दे पाया।

मां तरसती हुई जुदा हो गई बेटे को देखने की आस में
बीवी भी उम्मीद से ना रह सकी,देश सरहद को बचाने की लड़ाई में।

शुक्र करो उन जांबाजों का बदौलत जिनकी सोते हो तुम घर में बड़े आराम से
शुक्र करो उन जांबाजों का जो कभी सोये नहीं सरहदों पर कभी भी आराम से।

कुछ नहीं कर सकते तो इतना ही सम्मान कर देना बस
शहीदो की मा अगर सामने दिख जाए उसका बेटा बन जाओ बस।

शहीदो के बच्चें दिख जाए उनके चाचा दादा बन जाओ बस
शहीदों की बहन बेटियां मिल जाए तो उनके भाई – परिवार बनकर हिफाज़त कर देना बस।

आपने गावों, शहरों में शहीदों के घरों की हमेशा हिफाज़त कर देना बस
शहीदों के घर परिवार पर हमेशा साया बनकर रहना बस।

शहीदों के घरों को हमेशा सजाकर प्यार से रखना बस
शहीदों के बच्चों लिए अपने बच्चो में प्यार भरकर रखना बस।

फिर देश हमारा हमेशा सुरक्षित रहेगा जांबाजों की शान से
शहीदों के हर परिवार को सम्मान मिलेगा शहीदों के नाम से।

चलो शहीदों के नाम की शपथ लेते है शहीदों के घरों की मिलकर सब जिम्मेदारी लेते हैं।

अब शहीदों के परिवार के आंसू नहीं गिरने देंगे
मिलकर आज ये ज़िम्मेदारी दिल से सभी लेंगे।

फिर किसी भी शहीद परिवार को रोना नहीं आएगा
अब हर मा का सर अपने शहीद बेटे के नाम से ऊंचा हो जाएगा।

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